चंदौली /जवाबदेह सरकार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेंशन, महिलाओं की आजीविका और सामाजिक अधिकारों को लेकर चलाए जा रहे अभियान के तहत कार्यकर्ताओं ने चकिया में लोगों से संवाद किया। इस दौरान लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के सवालों पर चर्चा करते हुए एआईपीएफ राष्ट्रीय समिति सदस्य अजय राय ने कहा कि आज लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ा संकट केवल सत्ता का केंद्रीकरण नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर उठते सवाल हैं।अजय राय ने कहा कि व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—इन तीनों का मूल दायित्व किसी सत्ता या सरकार के प्रति नहीं, बल्कि संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह होना है। लोकतंत्र का अर्थ जनता की, जनता के द्वारा और जनता के लिए सरकार है। ऐसे में जब संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्णय लेने के बजाय सत्ता के दबाव या प्रभाव में दिखाई देती हैं, तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होती है।उन्होंने कहा कि संविधान किसी सरकार की सुविधा का दस्तावेज नहीं है, बल्कि देश के नागरिकों की स्वतंत्रता, समानता, न्याय और गरिमा की रक्षा का सर्वोच्च संकल्प है। इसलिए संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रत्येक लोकतांत्रिक नागरिक की जिम्मेदारी है।अजय राय ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। जनता को रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक आजीविका का अधिकार मिलना भी लोकतांत्रिक शासन की जिम्मेदारी है। सरकार को इन बुनियादी सवालों पर जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।उन्होंने कहा कि सवाल किसी एक दल या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ढांचे का है। क्या हमारी संवैधानिक संस्थाएं आज भी उतनी ही स्वतंत्र और निर्भीक हैं, जितनी एक जीवंत लोकतंत्र में होनी चाहिए—इस पर देश में गंभीर बहस जरूरी है।इस दौरान अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों ने भी लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का संकल्प लिया।

